डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
मिसाइल मैन ऑफ इंडिया • जनता के राष्ट्रपति • भारत रत्न
15 अक्टूबर 2026 • 95वीं जयंती • विश्व छात्र दिवस
एक दृष्टि में
| पूरा नाम | अवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम |
|---|---|
| जन्म | 15 अक्टूबर 1931 | , रामेश्वरम (तमिलनाडु)
| निधन | 27 जुलाई 2015, शिलांग – छात्रों को व्याख्यान देते हुए |
| उपाधियाँ | मिसाइल मैन ऑफ इंडिया | , पीपल्स प्रेसिडेंट
| राष्ट्रपति काल | 25 जुलाई 2002 – 25 जुलाई 2007 |
| सर्वोच्च सम्मान | भारत रत्न (1997) | , पद्म विभूषण (1990), पद्म भूषण (1981)
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
डॉ. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता जैनुलाब्दीन नाव के मालिक थे। बचपन में कलाम ने अखबार बाँटने का काम भी किया।
उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज से भौतिकी और मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
वैज्ञानिक योगदान
- SLV-III – भारत का पहला स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल। 18 जुलाई 1980 को रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में पहुँचा।
- IGMDP – अग्नि, पृथ्वी, आकाश, नाग और त्रिशूल मिसाइलों का विकास। इसी कारण उन्हें मिसाइल मैन ऑफ इंडिया कहा गया।
- पोखरण-II (1998) – भारत को परमाणु शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका।
- Technology Vision 2020 और India 2020 के माध्यम से विकसित भारत का रोडमैप दिया।
प्रमुख पुस्तकें
- विंग्स ऑफ फायर (अग्नि की उड़ान) – आत्मकथा
- इग्नाइटेड माइंड्स (तेजस्वी मन) – युवाओं को समर्पित
- इंडिया 2020 – विकसित भारत का विजन
- टर्निंग पॉइंट्स, इंडोमिटेबल स्पिरिट, माई जर्नी आदि
उनका महत्व
- सादगी और चरित्र – राष्ट्रपति रहते हुए भी साधारण जीवन जीते रहे।
- युवाओं के प्रति समर्पण – अंतिम सांस तक छात्रों को पढ़ाते रहे। 15 अक्टूबर को विश्व छात्र दिवस मनाया जाता है।
- आत्मनिर्भर भारत का विजन – विज्ञान, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने का सपना दिया।
- राष्ट्रीय एकता – सभी धर्मों का सम्मान किया और देश को एक सूत्र में बाँधा।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि उन्होंने लाखों गरीब बच्चों को यह विश्वास दिलाया कि “मैं भी कुछ कर सकता हूँ”।
प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान
- भारत रत्न (1997)
- पद्म विभूषण (1990)
- पद्म भूषण (1981)
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार (1997)
- अनेक अंतरराष्ट्रीय सम्मान
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के अनमोल विचार
सफलता और पहचान:
“सफलता तब है जब आपका सिग्नेचर ऑटोग्राफ में बदल जाए।”
“सफलता तब है जब आपका सिग्नेचर ऑटोग्राफ में बदल जाए।”
सपने और कोशिश:
“सपने वो नहीं हैं जो आप सोने के बाद देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको सोने नहीं देते।”
“सपने वो नहीं हैं जो आप सोने के बाद देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको सोने नहीं देते।”
कड़ी मेहनत और हार:
“अपनी पहली जीत के बाद आराम मत करो, क्योंकि अगर आप दूसरी बार हार गए, तो बहुत से होंठ यह कहने का इंतज़ार कर रहे होंगे कि आपकी पहली जीत सिर्फ एक किस्मत थी।”
“अपनी पहली जीत के बाद आराम मत करो, क्योंकि अगर आप दूसरी बार हार गए, तो बहुत से होंठ यह कहने का इंतज़ार कर रहे होंगे कि आपकी पहली जीत सिर्फ एक किस्मत थी।”
मुश्किलें और ताकत:
“मुश्किलें जिंदगी का हिस्सा हैं। उनसे भागना नहीं चाहिए, बल्कि अपनी ताकत को पहचानना चाहिए।”
“मुश्किलें जिंदगी का हिस्सा हैं। उनसे भागना नहीं चाहिए, बल्कि अपनी ताकत को पहचानना चाहिए।”
सूरज की तरह चमकना:
“अगर आपको सूरज की तरह चमकना है, तो पहले सूरज की तरह जलना सीखें।”
“अगर आपको सूरज की तरह चमकना है, तो पहले सूरज की तरह जलना सीखें।”
इंतज़ार बनाम कोशिश:
“इंतजार करने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।”
“इंतजार करने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।”
निष्कर्ष
15 अक्टूबर 2026 को डॉ. अब्दुल कलाम की 95वीं जयंती पर हम उनके सपनों, संघर्ष और समर्पण को याद करते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि गरीबी और असफलता सफलता की राह में बाधा नहीं, बल्कि ईंधन हैं।
जय हिंद! जय विज्ञान! जय कलाम!

